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सावरकर_का_फासीवाद_मुर्दाबाद ! #ये_खालिद_सैफी_हैं 300 दिनों से जेल मे बंद हैं

ये_खालिद_सैफी_हैं 300 दिनों से जेल मे बंद हैं,
अच्छे भले खाते पीते घराने से हैं, लेकिन इंसानियत के दर्द और अपने कौम को जालिमों से बचाने के ज्जबे ने जेल भेज दिया,

” खालिद सैफी ” मुस्लिम समाज का एक मशहूर नाम, मुसलमानों का कोई भी मसला हो जैसे भीड़तंत्र द्वारा हत्याएँ हों, NRC, CAA हो, झुठी गिरफ्तारीयां हों, भारत मे पुलिस के दमन से लेकर फिलस्तीन मे इज्राइल का आतंकवाद, और अन्याय किसी के भी साथ हो चाहे वो हिंदू इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या का मामला हो, खालिद सैफी न्याय, मानवता और हिंदु मुस्लिम ब्रदरहुड के लिए बेबाकी से काम करते थे, खालिद सैफी United Against Hate से जूडे हुए थे और UAH गरीबों को न्याय, कमजोरों को उनके हक दिलाने और भारतीय लोकतंत्र को जालिमों से बचाने के लिए काम कर रही थी, UAH के उठाए गए आंदोलनों से से बहुत सारे नाम मशहूर हो गए ,

UAH के एकटिव मेम्बर नदीम खान अपनी टीम के साथ मिलकर देश भर मे मुस्लिम समाज को जागरूक कर रहे थे, उनका काम फैल रहा था और युवाओं मे प्रभावित हो रहा था, उन्होंने NRC के मामले मे आसाम की जमीन पर जाकर काम किया, जेएनयु के छात्र नजीब के गायब होने पर दिल्ली मे जबरदस्त आंदोलन नदीम खान और उनकी टीम ने किया और फिर इस आंदोलन से कई सारे लीडर बन गए, रोहीत वेमुला की लडाई मे भी आगे थे,

कमी कोताही सब मे होती है लेकिन जब मुसीबत का वक्त हो तो जिन्दा कौमों की पहचान ये होती है के वो अच्छाईयों पर नजर रखती है, *मोदी सरकार आने के बाद जब भारत की सडकों पर, गाय, राम, लव जिहाद के नाम पर संघी गुंडो ने माॅब लिंचींग का आतंक फैलाना शुरू किया तो, खालिद सैफी, उमर खालिद, तमन्ना पंकज, उवैस, नदीम खान, शारीक, आसीफ, बनोजयोतसना और जिनके नाम अभी याद नही पुरी UAH की टीम ने मिलकर #खौफ_से_आजादी के प्रोग्राम किये, माॅबलिंचींग पीडितों के लिए टालफ्रि हेल्प लाइन शुरु कि, ऐसे ही हर जुल्मों सितम और ना इंसाफी के खिलाफ़ UAH काम कर रही थी, UAH का काम कितना असर अंदाज हो चुका था उसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है के UAH के खिलाफ़ सरकारी करेक डाउन शुरू करवाने के लिए ग्रह मंत्री अमित शाह को पार्लियामेंट मे UAH के विरुद्ध बयान देना पडा, फिर उसके बाद UAH को दिल्ली दंगो मे फंसा दिया गया, खालिद सैफी जैसे इंसान को जेल मे डाल दिया,* खालिद सेफी का निजी कारोबार और हैसियत इतनी थी के वो अगर न्याय ओर सामाजिक बराबरी और इज्जत की लडाई मे हिस्सा नही लेते तो मस्त रहते, लेकिन खालिद हों, नदीम हों के UAH, इनके दिलों मे मजलूमों का दर्द है, समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक करने की तडप है, और आज वो इसी की कीमत चुका रहे हैं,
*बहुत से लोग शिकवा करते हैं के पुराने लोग काम नही करते जालिमों से समझौता कर लेते हैं, हमारे नौजवान एक्टिव नही हैं, कौम का क्या होगा? मै उनसे सिर्फ यही पुछता हूँ के कौम के युवा जब UAH, खालिद सैफी की शकल मे सामने आए काम किये लेकिन जब उन पर जालिम सरकारी मुसीबत आई तो हम सबने क्या किया??*
फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे हुए, खालिद भाई ने काले कानून CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के ज़रिए फासिस्ट ताक़तों को खूब लताड़ा था।
बदले में फासिस्ट सरकार ने खालिद सैफी पर दंगा कराने का आरोप लगा कर अंदर कर दिया, जगतपुरी थाने मे उन पर पुलिस टॉर्चर की सारी हद पार की गई, पैर तोड़ कर व्हील चेयर पर पहुंचा दिया गया था। अभी भी जेल में हैं, 300 दिनों से उनकी पत्नी नरगीस भाभी की आंखे इंतजार काटती हैं और उनके बच्चे ताहा, मरयम और यसा तसल्लियों से बेजा़र! हर सुनवाई पर सरकार एक नया झुठ लेकर पहुंच जाती है। खालिद सैफी, शरजील इमाम, उमर खालिद, आसीफ, गुल फिशां, तेल्तुमबडे, नताशा, गोगोई और उनके जैसे बेशुमार साथी आपके अधिकारों की लड़ाई लड़ने के जुर्म में फासिस्ट सरकार की क़ैद में हैं। इस वक्त आपका फर्ज़ है कि इन की रिहाई के लिए आप आवाज़ लगाएं। 300 दिन जेल का अज़ाब बहुत दर्दनाक होता है, खालिद सैफी और उनके परिवार के लिए दुआ किजिये।

*भगत-बिस्मिल-अशफ़ाक ज़िन्दाबाद*
*सावरकर का फासीवाद मुर्दाबाद !*

✍ #समीउल्लाह_खान
Journalist, Activist
ksamikhann@gmail.com

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