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किसान आन्दोलन को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे शरद पवार!

किसान आन्दोलन को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे शरद पवार!

किसान आंदोलन को लेकर एनसीपी के प्रमुख शरद पवार नौ दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंगे। रविवार को यह जानकारी एनसीपी महाराष्ट्र कार्यालय ने दी।

 

जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को किसानों की समस्याओं से अवगत कराएंगे। गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले कई दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

किसानों और सरकार के बीच अब तक कई बार बात हो चुकी है। सरकार का कहना है कि एमएसपी खत्म नहीं होगी। वहीं, किसान तीनों कानूनों को रद करवाने पर अड़ें हैं। आठ दिसंबर को भारत बंद है। नौ दिसंबर को फिर से सरकार और किसानों के बीच वार्ता होगी।

 

इधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर शरद पवार की टिप्पणी कांग्रेस को रास नहीं आ रही। महाराष्ट्र कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष यशोमती ठाकुर ने कहा था कि यदि राज्य में सरकार स्थिर रखनी है, तो कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर कोई भी गलत टिप्पणी करना बंद करना होगा।

 

दो दिन पहले शरद पवार से एक साक्षात्कार में पूछा गया था कि क्या देश राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार है? इसका जवाब देते हुए शरद पवार ने कहा था कि इसको लेकर कुछ सवाल हैं।

 

राहुल गांधी में राजनीतिक स्थिरता की कमी दिखाई देती है। पवार की इस टिप्पणी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए यशोमती ठाकुर ने उक्त टिप्पणी की थी।

 

कांग्रेस के नाराजगी व्यक्त करने के बाद राकांपा प्रवक्ता महेश तपासे ने सफाई देते हुए कहा कि पवार की टिप्पणी पितातुल्य व्यक्ति समान एक वरिष्ठ नेता की सलाह की तरह है।

 

महाराष्ट्र विकास आघाड़ी की सरकार तीन दलों की सरकार है। वह शरद पवार ही थे, जिन्होंने हाल ही में बराक ओबामा की पुस्तक में राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों की आलोचना की थी।

 

पवार ने साफ कहा था कि ओबामा को अन्य देशों के नेताओं पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद बनी तीन दलों की सरकार के शिल्पकार शरद पवार ही माने जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कई बार शरद पवार को सरकार के अभिभावक का दर्जा दे चुके हैं।

 

इसके बावजूद कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष को राहुल पर की गई पवार की एक छोटी से टिप्पणी भी रास नहीं आई। जबकि, इसके पहले सरकार का नेतृत्व कर रही शिवसेना की तरफ से भी कांग्रेस पर टिप्पणी की जा चुकी है।

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