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महिनेभर से क्रुझ पर अटके हुए भारतीय नाविक, कर्मचारियों का मुंबई बंदरगाह पर उतरने का रास्ता खुला : मुख्यमंत्री के प्रयासों से मिली केंद्रीय जहांजरानी मंत्रालय की अनुमति

मुंबई, दि 22 : मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रयासों से आखिर मरिला डिस्कवरी इस एक बड़े क्रुझ शिप पर पिछले महीनेभर से अटके हुये १४६ भारतीय नाविक (खलाशी) को मुंबई बंदरगाह पर उतरने की अनुमति मिली है। मुख्यमंत्री ने स्वयं जहांजरानी राज्यमंत्री मनसुख मांडविया के साथ बातचीत की जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत मंगलवार को इस संदर्भ में एक आदेश जारी किया। जिसका लाभ समुद्र में जगहों-जगहों पर जहांज में अटके हुए तकरीबन ४० हजार नाविक, जहांज के कर्मचारियों को भी होगा।
गत मंगलवार को सुबह से इस क्रुझ पर के नाविकों को एवं कर्मचारियों को मुंबई बंदरगाह पर उतरना शुरू हुआ । इन सभी की चिकित्सक जांच भी होगी। साथ ही उन्हें क्वारंटाईन करने के लिए एक इमारत भी उपलब्ध कराई गई है।
यह मरिला डिस्कवरी क्रुझ 2 से 6 अप्रैल इस अवधि में कोचीन, न्यू मंगलोर, गोवा और मुंबई इन स्थानों पर पहुंचनेवाली थी। इसी दौरान कोरोना का उद्रेक भी शुरू हुआ और इस क्रुझ ने लाएम चाबँग इस थायलँड में १४ मार्च को सभी यात्रियों को छोड़ा। उसके बाद यह क्रुझ १२ अप्रैल को कोचीन में पहुंची। लेकिन वहाँ इस क्रुझ के कर्मचारियों को उतरने की अनुमति नहीं दी तथा उन्हें रोका गया। जिसके बाद यह क्रुझ मुंबई के समीप के समंदर में १४ अप्रैल को पहुंची और तभी से इस कृझ के सभी कर्मचारी मुंबई में उतरने की राह देख रहे थे। जहांज में सवार किसी भी कर्मचारी को कोरोना की बाधा नहीं हुई, इस बात को भी स्पष्ट किया गया। थायलँड को छोड़कर ३७ दिन हो गए लेकिन इस जहांज पर किसी भी प्रकार का संक्रमण नहीं होने की बात कंपनी ने कहीं थी, बावजूद उसके अनुमति नहीं मिल रही थी।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस विषय को जहांजरानी मंत्रालय के निदर्शन में लाया। प्रधान सचिव विकास खारगे, आशिष कुमार सिंह और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय भाटीया निरंतर पहल कर रहे थे। जिसके बाद गत मंगलवार को इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया। इसमें व्यापारी एवं व्यावसायिक जहांज पर सवार कर्मचारी, नाविकों को भारतीय बंदरगाह पर उतरना एवं बंदरगाह से जाना संभव हुआ, हालांकि इसके लिए निश्चित कार्यपद्धती दी गई है। उसके अनुसार ही इन कर्मचारियों ने उनके पिछले २८ दिनों के यात्रा संबंधित जानकारी बताने, बंदरगाह पर उतारने के बाद कोविड का परीक्षण करना, जरूरत पड़ने पर उनका क्वारंटाईन करना, इन नाविकों एवं कर्मचारियों ने सीधे उनके घर छोड़ने के लिए ट्रांझिट पास, वाहनों की व्यवस्था आदि बातें शामिल है। इसका लाभ समंदर में विविध जहाजों पर अटके हुये ३५ से ४० हजार भारतीय नाविकों को भी होगा। आगे यह क्रुझ नॉर्वे के लिए रवाना होगी।

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