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*जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र ने लॉकडाउन में एक करोड़ 34 लाख से अधिक की मदद वितरित की है*

इस समय सबसे अच्छा और पुण्य का काम यह है कि परेशान लोगों की देखरेख और उनकी ज़रूरतें पूरी की जाए: रिजवान-उर-रहमान खान

मुंबई: 7.अप्रैल – देश और महाराष्ट्र में लॉक डाउन को दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुके हैं। इस दौरान अचानक लॉक डाउन से जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनकी कठिनाइयों को महसूस करते हुए,

जमात-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र ने अपने सदस्यों और कार्यकर्ताओं को अल्लाह के बंदों की सेवा करने के लिए जुटाया।

जमाअत के सदस्यों ने इस कठिन समय के दौरान संसाधनों की कमी के बावजूद, चल रहे बंद के दौरान 22 से 31 मार्च की कालावधि में वंचित लोगों को एक करोड़ 34 लाख से अधिक रुपयों की मदद की। इसमें खाद्य वस्तुएं, तैयार खाद्य पदार्थ और नकदी भी शामिल हैं।

यह स्पष्ट रहे कि जमात-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र ने अपने सदस्यों और कार्यकर्ताओं की मदद से 20,900 से अधिक परिवारों में 1 करोड 13 लाख 14 हजार 635 रुपये का राशन पहोनंचाया और 14 लाख 21 हजार 950 रुपये के भोजन पैक 48400 लोगो तक वितरित किए। 5 लाख रुपये की दवाएं और नकद भी वितरित किए गए।

राहत कार्य को जमाअत के सदस्यों द्वारा जारी रखा जा रहा है और जमाअत ने इसे तब तक जारी रखने का संकल्प लिया है जब तक कि तालाबंदी समाप्त नहीं हो जाती।

जमाअत के महाराष्ट्र राज्य के अमीर रिजवानुर्रहमान खान ने कहा के जमात-ए-इस्लामी अकेली इतनी बड़ी लोकसंख्या को राहत देने का काम नहीं कर सकती है, इसलिए अन्य संगठनों और व्यक्तियों को लोगों को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए। ”

रिजवान-उर-रहमान खान ने कहा कि यह जानकर खुशी हो रही है कि समाज का एक बड़ा वर्ग संकटग्रस्त लोगों की सेवा करने की प्रक्रिया में मसरूफ है। राज्याध्यक्ष ने कोरोना वायर्स से परेशान और पीड़ित लोगों के संकट पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इस मुश्किल दौर से निकल जाएंगे और सामान्य स्थिति में लौट आएंगे और देश के दुन्या की समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

साथ ही, रिजवान-उर-रहमान खान ने लोगो से अपील की कि हमारे लिए यह समय है कि हम अपने पालनहार की ओर पलटें और अपने कार्य,आमाल की जवाबदेही का एहसास अपने अंदर पैदा करें और अपना जायज़ा व अहतेसाब करें।

मुंबई, थाने, जलगाँव, बुलढाणा, औरंगाबाद, जालना, परभाणी, नांदेड़, आयुतमल, अकोला और कोल्हापुर जिल्हों और उनके तालूक़ों सहित महाराष्ट्र भर से जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने व्यक्तिगत रुचि ली और ज़रूरतमंदों के लिए भोजन, राशन, दवाइयां और नकदी रक़म वितरित की, जो एक सराहनीय कदम है।

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