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क्या तब्लीग़ी जमात के अमीर मौलाना साद ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये दान किए ? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

एक पोस्ट के ज़रीया सोशल मीडीया पर ये दावा किया गया है कि मौलाना साद साहिब ने वज़ीर-ए-आज़म के क़ौमी रीलीफ़ फ़ंड में 1 करोड़ का अतीया किया है

पैग़ामWhatsApp और दीगर सोशल मीडीया प्लेट फॉर्म्स पर गर्दिश कर रहा है जिसमें न्यूज़लेटर नामी एक अख़बार की एक तस्वीर है, और इस के पहले सफ़े पर मारूफ़ ख़बरें, शहि सुर्ख़ी में लिखा है 28 मार्च को , मौलाना साद ने1 करोड़ की रक़म बतौर अतीया वज़ीर-ए-आज़म मोदी रीलीफ़ फ़ंड में दी। इस के तहत आने वाली रिपोर्ट में कहा गया है , “बेशतर इस्लाम को दहश्तगर्दी के तौर पर बदनाम किया गया है। लेकिन इस बार को रोना ने तमाम मज़हब को मुत्तहिद कर दिया है। ये निज़ाम उद्दीन मर्कज़ से जमात के अमीर मौलाना साद की वजह से है , जिन्होंने वज़ीर-ए-आज़म मोदी रीलीफ़ फ़ंड में1 करोड़ की रक़म बतौर अतीया की। मौलाना साद ने ये अतीया खु़फ़ीया रखा । मुतनाज़ा ख़बरों में ये भी शामिल किया गया है , “ये वक़्त मोदी जी को बदनाम करने का नहीं बल्कि उनकी हिमायत करने का है , इस वक़्त मोदी जी मलिक के मुफ़ाद के लिए सोच रहे हैं”

वाइरल वाट्स एप्प Post

‘रिपोर्ट पर एक सरसरी नज़र से ये वाज़िह होजाता है कि ये जाली है , क्योंकि ज़बान और ग्रामर किसी मयारी अंग्रेज़ी अख़बार के मतन की तरह नहीं लगता है। अख़बार , न्यूज़लेटर , वाक़्यता एक असली अख़बार है , शुमाली आयरलैंड से शाय होता है। न्यूज़लेटर शुमाली आयरलैंड के एक रोज़ाना के अहम अख़बारात में से एक है , और ये अंग्रेज़ी ज़बान का सबसे क़दीम रोज़नामा है जो अभी तक इशाअत में है , जो1737 मैं शुरू किया गया था

जब हमने ‘रिपोर्ट मैं मज़कूर अलफ़ाज़ के साथ न्यूज़लेटर की वेबसाइट को तलाश किया तो हमें कोई नतीजा नहीं मिला। मज़ीद ये कि इस बात का तक़रीबन इमकान नहीं है कि हिन्दोस्तान में किसी को वज़ीर-ए-आज़म के इमदादी फ़ंड में चंदा फ़राहम करने पर किसी आइरिश अख़बार के पहले सफ़े पर सबसे अहम ख़बर की इत्तिला दी जाये। बहुत सारे हिन्दुस्तानी करूणा वाइरस के ख़िलाफ़ जंग के लिए फ़राख़दिली से अतीया दे रहे हैं , और उन्हें हिन्दुस्तानी अख़बारों में भी अहम ख़बर नहीं कहा जाता है

जब हमने इंटरनैट पर मज़ीद तलाश की तो हमें मालूम हुआ कि जाली पैग़ाम में इस्तिमाल होने वाले अख़बार की तस्वीर हक़ीक़त में6 जून2019 की है , ना कि30 मार्च2020 की तरह पैग़ाम में दिखाया गया है।6 जून2019 की एक रिपोर्ट में , बी-बी सी ने उसी दिन के आइरिश पेपर की शबेहा अमरीकी सदर डोनल्ड ट्रम्प की शहि सुर्ख़ीयों पर हावी होने की एक रिपोर्ट पर तहरीर की थी , जिसमें तजज़िया किया गया था कि ट्रम्प के दौरा आयरलैंड की ख़बरों को अख़बारों ने कैसे पहुंचाया

असल तस्वीर जो जाली ख़बर बनाने के लिए इस्तिमाल हुई थी

इस इमेज से ये बात वाज़िह हो गई है कि मौलाना साद की जानिब से वज़ीर-ए-आज़म के इमदादी फ़ंड में1 करोड़ का अतीया करने की जाली रिपोर्ट को ट्रम्प के दौरे से मुताल्लिक़ रिपोर्ट की जगह अख़बार की असल तस्वीर पर चस्पाँ किया गया था। और अब इस जाली ख़बर को सोशल मीडीया प्लेटफ़ार्मज़ पर मौलाना साद और तब्लीग़ी जमात के साथीयों में ग़लत मालूमात फैला कर उन्हें अहम मसला से भटकाने की कोशिश की जारीय है ऐसे वाइरल पैग़ाम रोज़ाना सैंकड़ों की तादाद में गर्दिश करते हैं जिनका असल मक़सद आम लोगों की तोजहा असल मुद्दे से हटाना होती है

बी जे पी आई टी सेल तब्लीग़ी जमात की “जाने अनजाने हुई ग़लती के लिए पूरी मुस्लिम बिरादरी को निशाना बना रही है।लिहाज़ा ऐसे किसी भी मिसेज को फ़ारवर्ड ना करें

हमारी तहक़ीक़ात में मुंदरजा बाला ख़बर बिलकुल बे-बुनियाद और गुमराहकण है

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