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कोरोना वायरस: क्या इस वीडियो में दिख रहे लोग तबलीग़ के थे?- फ़ैक्ट चेक

तबलीग़ी जमात के मार्च महीने में हुए धार्मिक आयोजन में शामिल लोगों में कोविड-19 के संक्रमण के बाद देश में कुल कोरोना वायरस के मरीज़ों की संख्या में तेज़ी से बढ़ी.इस संक्रमण से मरने वाले 56 लोगों में से 15 लोग के तार जमात से जुड़े हुए थे. कुल 2000 कोविड-19 से संक्रमित लोगों में से 400 लोग तबलीग़ी जमात से जुड़े हुए हैं.लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई और दावे भी किए जा रहे हैं.

ऐसा ही एक वीडियो है जिसके ज़रिए दावा किया जा रहा है कि जमात में शामिल कोरोना संक्रमित लोगों ने पुलिस पर थूका ताकि उनमें भी संक्रमण फैल जाए.

गुरुवार शाम को ट्विटर पर एक यूज़र ने 27 सेकेंड के इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा- ‘’जिनको सबूत चाहिए वो ये देख लें’’

इस वीडियो को ट्विटर पर 81 हज़ार से ज्यादा लोगों ने देखा है और लगभग़ 4 हज़ार लोगों ने रिट्वीट किया है. हालांकि, यह ट्वीट अब डिलीट किया जा चुका है.

वहीं फ़ेसबुक पर भी इसे ख़ूब शेयर किया जा रहा है. मेधराज चौधरी नाम के यूज़र ने इस वीडियो को शेयर किया है जिसे दो लाख लोगों ने देखा है.

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इस वीडियो में एक शख़्स बैठा है जिसके अगल-बगल और सामने पुलिस वाले बैठे हैं. शख़्स सामने बैठे पुलिस वाले पर थूकता है. इसके बाद पुलिस वाले उठ कर उसे मारने लगते हैं.

बैकग्राउंड में काफ़ी शोर सुनाई देता है और वीडियो यहीं ख़त्म हो जाता है. इस वीडियो को निज़ामुद्दीन तबलीग़ी जमात से जोड़ा जा रहा है.

दरअसल बुधवार को सामने आई समाचार एजेंसी पीटीआई और एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक तबलीग़ी जमात के आयोजन में हिस्सा लेने वाले 167 लोगों को तुगलकाबाद स्थित रेलवे के क्वारंटीन सेंटर में रखा गया. जहां इन लोगों ने डॉक्टरों सहित स्वास्थ्य कर्मचारी के साथ ना सिर्फ़ बदसलूकी की बल्कि उन पर थूका भी. वायरल हो रहे वीडियो को इस ख़बर के साथ जोड़ कर शेयर किया जा रहा है.*

हमने ये पता लगाने की कोशिश की कि आख़िर ये घटना कब हुई और क्या वीडियो और इसके साथ किया जाने वाला दावा सही है?इस वीडियो पर पहला संदेह इसलिए भी होता है क्योंकि तबलीग़ी जमात के लोगों को अस्पताल डीटीसी की बसों में ले जाया गया था. लेकिन वीडियो में नज़र आ रही गाड़ी पुलिस की वैन जैसी लगती है.शख़्स पुलिस से घिरा हुआ है, अगर ये मेडिकल जांच के लिए जा रहा है तो कोई मेडिकल स्टाफ़ गाड़ी में क्यों नहीं है?

इस वीडियो के की-फ्रेम का इस्तेमाल करके हमने रिवर्स सर्च किया तो हमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर एक वीडियो मिला.

दो मार्च, 2020 को पब्लिश हुए इस वीडियो के मुताबिक़, ‘’एक अंडरट्रायल क़ैदी ने अपने साथ जा रहे पुलिस वाले से मारपीट की और उन पर थूका. दरअसल ये शख़्स पुलिस वालों से इसलिए नाराज़ था क्योंकि उसे वो खाना खाने की इजाज़त नहीं दी गई जो उसके घर वाले उसके लिए लेकर आए थे.‘’

हमने जब इस वीडियो को और सर्च किया तो हमें महाराष्ट्र टाइम्स औऱ मुंबई मिरर पर भी ये वीडियो मिला.

मुंबई मिरर ने इस वीडियो को 29 फ़रवरी, 2020 को शेयर किया है.
इसकी रिपोर्ट के मुताबिक़ इस शख़्स का नाम मोहम्मद सुहैल शौकत अली है जिसकी उम्र 26 साल है. इसे मुंबई कोर्ट में सुनवाई के लिए लाया गया था. जहां उसका परिवार उसके लिए घर का खाना लेकर आया था लेकिन पुलिस ने उसे ये खाना नहीं खाने दिया.

इससे नाराज़ हो कर उसने पुलिस वालों से कहासुनी की और उन पर थूका. जिसके बाद पुलिस ने शौकत अली की पिटाई की.

दरअसल, ये वीडियो एक मिनट 25 सेकेंड का है जिसमें शौकत अली नाम के इस शख़्स को पुलिस से बहस करते और उन्हें गालियां देते हुए भी सुना जा सकता है.लेकिन गुरुवार से इस वीडियो का 27 सेकेंड का हिस्सा वायरल हो रहा है और इसे निज़ामुद्दीन स्थित तबलीग़ी जमात से जोड़ा जा रहा है.

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि ये दिल्ली का नहीं बल्कि मुंबई का पुराना वीडियो है जिसका तबलीग़ी जमात या कोरोना वायरस मामले से कोई ताल्लुक नहीं है. इसके साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह झूठा है.
(बीबीसी हिन्दी, फ़ैक्ट चेक टीम.)

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