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कोरोना वाइरस से बचाओ’, नई दिल्ली में गाय का पेशाब पीने की पार्टी

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नई दिल्ली दार-उल-हकूमत दिल्ली में ‘ऑल इंडिया हिंदू यूनीयन ने को रोना वाइरस से बचने की ख़ातिर गाय का पेशाब पीने की एक ख़ुसूसी पार्टी का एहतिमाम किया, जिसमें कम-अज़-कम दो सौ हिंदू अफ़राद शरीक हुए

भारत में कुछ हिंदू ग्रुपों का इसरार है कि गाय का पेशाब तिब्बी लिहाज़ से फ़ाइदामंद है, इसलिए उसे पीने से को रोना वाइरस से बचा जा सकता है। हिंदू मत में गाय को मुक़द्दस क़रार दिया जाता है और यही वजह से कि कुछ क़दामत पसंद हिंदूओं में इस तरह के फ़र्सूदा ख़्यालात राइज हैं। ताहम तिब्बी माहिरीन बारहा कह चुके हैं कि ऐसे कोई शवाहिद नहीं कि गाय का पेशाब कैंसर या किसी दूसरी बीमारी का ईलाज साबित हो सकता है

नई दिल्ली में इस पार्टी का एहतिमाम करने वाली ‘ऑल इंडिया हिंदू यूनीयन के मुंतज़मीन ने कहा है कि इसी तरह की पार्टीयां दीगर भारती शहरों में भी मुनाक़िद की जाएँगी। ये पार्टी ‘ऑल इंडिया हिंदू यूनीयन के नई दिल्ली में वाक़्य सदर दफ़्तर में मुनाक़िद की गई थी

इस पार्टी में शरीक होने वाले ओम प्रकाश ने रोइटरज़ से गुफ़्तगु में कहा, ”हम गुज़श्ता इक्कीस बरसों से गाय का पेशाब पीते आ रहे हैं और हम गाय के गोबर से नहाते भी हैं। हमें कभी भी अंग्रेज़ी दवा लेने की ज़रूरत नहीं पड़ी है।’

’ऑल इंडिया हिंदू यूनीयन के सरबराह चकरा पानी महाराज ने इस तक़रीब के दौरान को रोना वाइरस के फ़र्ज़ी कैरीकेचर (ख़ाके के साथ एक तसावीर भी बनवाई, जिनमें वो गाय के पेशाब का पियाला थामे नज़र आ रहे हैं

’ऑल इंडिया हिंदू यूनीयन के सरबराह चकरा पानी महाराज (दाएं का कहना है कि ऐसी पार्टीयां दीगर शहरों में भी होंगी

तिब्बी माहिरीन के इलावा भारत में रहने वाले अक्सरीयती हिंदूओं का कहना है कि गाय का पेशाब या गोबर तिब्बी लिहाज़ से किसी बीमारी का ईलाज नहीं हो सकता। ताहम हुकमरान हिंदू क़ौम परस्त भारतीय जनता पार्टी के मुतअद्दिद रहनुमा वकालत करते हैं कि गाय का पेशाब एक दवा है और इस से बिलख़सूस कैंसर का ईलाज मुम्किन है

रियासत आसाम में वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी की सयासी जमात से ताल्लुक़ रखने वाले एक सियास्तदान ने हाल ही में असैंबली के इजलास के दौरान कहा था कि को रोना वाइरस से बचने की ख़ातिर गाय का पेशाब और गोबर सूदमंद साबित हो सकता है

कोविड अनीस को आलमी वबा क़रार दिया जा चुका है, जिसकी वजह से कम-अज़-कम पाँच हज़ार अफ़राद हलाक जबकि एक लाख पैंतालीस हज़ार के लग भग मुतास्सिर हो चुके हैं। गुज़श्ता दिसंबर चीन से फूटने वाली इस वबा का अभी तक कोई ईलाज दरयाफ़त नहीं किया जा सका है। ताहम तिब्बी माहिरीन की कोशिश है कि इस बीमारी के ख़िलाफ़ जल्द अज़ जल्द कोई दवा तैयार कर ली जाये

अब शह रोइटरज़ बशकरहा डी डब्लयू उर्दू

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