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ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने वाला गुजरात का यह राजघराना बना मददगार

ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने वाला गुजरात का यह राजघराना बना मददगार

मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) के सियासी घमासान को लेकर खबरें तो कई दिन पहले से आने लगी थीं, लेकिन होली (Holi) से एक दिन पहले इन खबरों पर मुहर लगनी शुरू हो गई. कांग्रेस से नाराज़ बताए जा रहे वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के खेमे के 28 विधायक फोन स्विचऑफ करके बेंगलुरू चले गए गए तो इन अटकलों ने हकीकत की शक्ल ले ली. प्रदेश कांग्रेस के नेता सिंधिया को मनाने में जुटे गए और इस पूरी उथलपुथल को बीजेपी की साजिश करार देने लगे. वहीं मंगलवार को जब सिंधिया गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) के साथ पीएम मोदी से मिलने पहुंचे तो साफ कहा जाने लगा कि वह बीजेपी में शामिल होने वाले हैं.

देश के इस बड़े राजघराने का नाम आ रहा है सामने

वैसे तो सिंधिया पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री कमलनाथ से नाराज़ बताए जा रहे थे. वहीं मध्य प्रदेश के राजनीतिक जानकार सिंधिया और पीएम मोदी की इस मुलाकात में बड़ौदा राजघराने की अहम भूमिका बता रहे हैं

ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की ससुराल बड़ौदा राजघराने में है. कहा जा रहा है कि इसी राजघराने की महारानी ने सिंधिया और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत का रास्ता तैयार किया. यह उन्हीं की बदौलत संभव हुआ कि दूसरे चरण में बीजेपी और सिंधिया के बीच बातचीत हो रही है. वरना तो मध्य प्रदेश में कुछ दिन पहले हुई सियासी उठापठक फेल हो गई थी. जब एक-एक कर कांग्रेस के सभी विधायक वापस लौट आए थे तब कांग्रेस विधायकों के इधर-उधर भागने की चर्चाओं पर उस वक्त विराम लग गया था.

जानकार बताते हैं मध्य प्रदेश को लेकर रणनीति के लिए सोमवार को अमित शाह के घर बैठक हुई, जिसमें पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्रा शामिल हुए. उधर प्रधानमंत्री और सिंधिया के बीच मध्यस्थता सिंधिया के ससुराल पक्ष से बड़ौदा राजपरिवार की महारानी ने की. उन्होंने ही सिंधिया को भाजपा से संपर्क के लिए तैयार किया. उधर, प्रधानमंत्री ने सिंधिया से बातचीत का जिम्मा नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपा. तोमर मीटिंग के लिए सिंधिया के घर भी गए और वहीं आगे की रणनीति पर उनकी बातचीत हुई थी.

मध्य प्रदेश में यह चल रही है सियासी उठापठकइस बीच इस सियासी खिचड़ी की भनक लगते ही कांग्रेस आलाकमान भी एक्टिव हुआ. उसने सिंधिया को मनाने के लिए सचिन पायलट को भेजा गया. मिलिंद देवड़ा से भी बात कराई गई. बताया जा रहा है कि कमलनाथ ने भी सिंधिया से मिलने की पेशकश की, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला. सिंधिया ने खेमे के मंत्रियों के साथ मीटिंग कर आगे की रणनीति तय की. सूत्रों का कहना है कि सिंधिया के साथ 21 विधायक हैं और सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही ये सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे. और इस तरह राज्य की कमलनाथ सरकार अल्पमत में आकर गिर जाएगी.

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