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मोदी-ओ-शाह की हिट धर्मी ने देश की इज़्ज़त ख़ाक में मिला दी.. ✒️ आज़म शहाब

क़ौमी इन्सानी हुक़ूक़ कमीशन की जानिब से सी ए ए के ख़िलाफ़ सुप्रीमकोर्ट में दाख़िल मुदाख़िलत की अर्ज़दाशत को भले ही बी जे पी का आई टी सील एक सोशलिस्ट के ज़रीया दाख़िल करदा अर्ज़दाशत क़रार देकर ख़ातिर में ना लाने की मुहिम चला रहा है, मगर इस सच्चाई से शायद ही इनकार किया जा सके कि सी ए ए वापिस ना लेने की मोदी विशाह की हिट धर्मी ने दुनिया के सामने हमारे मलिक की इज़्ज़त ख़ाक में मिला दी है। ये उसी हिट धर्मी का नतीजा है कि आज यूरोपियन पार्लीमैंट से लेकर इंगलैंड-ओ-ईरान तक सी ए ए के हवाले से मोदी हुकूमत की पालिसीयों पर खुले आम तन्क़ीदें करने लगे हैं और पाबंदीयां आइद करने की बातें करने लगे हैं

गुज़श्ता रोज़ जब अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प हिन्दोस्तान के दौरे पर आए थे तो मोदी जी उनकी दोस्ती में कुछ इस क़दर रतब-उल-लिसान हुए थे कि उन्हें ट्रम्प की वापसी के दो रोज़ बाद इस बात की ख़बर हो सकी कि उनकी राजधानी में उनके ही नाम-लेवा होली से पहले ही मुस्लमानों के ख़ून की होली खेलने लगे हैं। लेकिन हिन्दोस्तान में मौजूद ट्रम्प और हज़ारों किलोमीटर दूर अमरीकी इंतिज़ामीया को इस की ख़बर फ़ौरन हो गई और अमरीकन कांग्रेस ने इस पर अपनी नाराज़गी का भी इज़हार कर दिया। मगर मोदी जी की ख़ामोशी दो दिन बाद टूटी और वो भी टविटर पर

मोदी जी को तो उनका क़ौमी मीडीया दो रोज़ तक ट्रम्प और उनकी दोस्ती की कैमिस्ट्री में उलझाए रखा था, बिलकुल इसी तरह जिस तरह ओबामा के दौरे के वक़्त हुआ था, अलबत्ता शाह जी ने अजीत डोवाल को दिल्ली की फ़सादज़दा गलीयों में सूरत-ए-हाल का जायज़ा लेने के लिए ज़रूर रवाना कर दिया। शायद वो ये देखने आए थे कि उनके कारिंदों ने उनके प्लान के मुताबिक़ काम किया या नहीं। अगर ऐसा ना होता तो फ़साद कराने के ज़िम्मेदार कपिल मिश्रा भी आज सलाख़ों के पीछे होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसलिए नहीं हुआ कि फ़साद की स्क्रिप्ट बहुत पहले से लिखी जा चुकी थी, जिसमें ताहिर हुसैन का नाम तो मौजूद था, लेकिन कपिल मिश्रा का नहीं था

क़ौमी इन्सानी हुक़ूक़ कमीशन की सदर मशील बिचलेत ज़ीरिया जानिब से सुप्रीमकोर्ट में दाख़िल इंटरवेशन की अर्ज़दाशत में जो बातें कही गई हैं वो मोदी हुकूमत के सी ए ए के मौक़िफ़ के बिलकुल बरख़िलाफ़ हैं। इस अर्ज़दाशत के ज़रीये सुप्रीमकोर्ट से कहा गया है कि वो दरख़ास्त गुज़ार को इस बात की इजाज़त दे कि वो कोर्ट के सामने इस बात को साबित करसके कि मोदी हुकूमत का सी ए ए का क़ानून किस तरह ना सिर्फ हिन्दोस्तान की आईन बल्कि उन बैन-उल-अक़वामी क़वानीन के भी ख़िलाफ़ है जिस पर इंडिया के भी दस्तख़त मौजूद हैं। इस अर्ज़दाशत में खासतौर से युवाईन ओ की क़रारदादों की बात की गई है जिसका इंडिया भी एक मैंबर है। होना तो ये चाहिए था कि इस अर्ज़दाशत के बाद हमारी हुकूमत सी ए ए के बारे में अपने मौक़िफ़ पर अज़सर-ए-नौ ग़ौर करती , मगर आई टी सेल के ज़रीये मशील ज़ीरिया को एक सोशलिस्ट साबित कर के उन्हें हिन्दोस्तान मुख़ालिफ़ बताया जा रहा है

फिर भी अगर बात सिर्फ मशील ज़ीरिया तक ही महिदूद रहती तो कहा जा सकता था कि उन्होंने भी अपनी नज़रियात की बुनियाद पर इसी तरह तंगनज़री का मुज़ाहरा किया है, जिस तरह मोदी-ओ-शाह और उनकी पार्टी के लोग कर रहे हैं, मगर यहां तो पूरा यूरोप-ओ-उषा-ए-इंडिया के ख़िलाफ़ खड़ा नज़र आता है। यूरोपियन यूनीयन की इस क़रारदाद के बारे में तो सभी जानते हैं, जो इंडिया की मुदाख़िलत से किसी तरह वक़्ती तौर पर रुक गई थी, मगर बाद में इस के अराकीन ने मोदी हुकूमत को सी ए ए के ख़िलाफ़ सख़्त वार्निग दी है। इस के इलावा इसी पार्लीमैंट के सत्तर फ़ीसद मैंबरान ने खुले तौर पर मोदी हुकूमत की तन्क़ीद की है। ईरान जो उषा-ए-में शायद हमारा सबसे बड़ा हलीफ़ है, उसने भी मोदी हुकूमत पर अलानिया तन्क़ीद की है। ईरान की ये तन्क़ीद दिल्ली फ़साद के तनाज़ुर में है, जिसे ईरान मुस्लमानों के क़त्ल-ए-आम से ताबीर करते हुए हिन्दोस्तान को ताकीद की है वो इस से बाज़ रहे, लेकिन सच्चाई ये है कि ईरान की तन्क़ीद की बुनियाद भी सी ए ए ही है

ओ आई सी (आर्गेनाईज़ेशन आफ़ इस्लामिक को ऑप्रेशन जो एक मुर्दा आर्गेनाईज़ेशन थी, मोदी हुकूमत की इस हिट धर्मी ने इस में भी जान डाल दी है। इस आर्गेनाईज़ेशन में85 ममालिक हैं। इस के मैंबरान ने भी इंडिया को सख़्त वार्निग दी है कि सी ए ए की बुनियाद पर मुस्लमानों के ख़िलाफ़ भेद-भाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने इस वार्निग पर ये जवाब देकर ख़ुद को मुतमइन कर लिया है कि ये हमारा दाख़िली मुआमला है और हम उसे हल करलींगे। जबकि सच्चाई ये है कि मोदी-ओ-शाह ने अपनी हिट धर्मी से अपने इन तमाम मुआमलात को बैन-उल-अक़वामी प्लेटफार्म पर पहुंचा दिया है जो कि यहां किसी को कानों ख़बर हुए बग़ैर ब-आसानी हल किया जा सकता था

ये एक सेंडीकेटेड फीड है इदारा ने इस में कोई तरमीम नहीं की है – बशकरेह क़ौमी आवाज़ ब्यूरो

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